Abhishek Singh
Romance
मोहब्बत है तो सुकून है
दर्द है तो जुनून है
मिल जाए मंज़िल,
अगर तो रुक जाऊँ मैं।
इश्क़ हो या दर्द,
ठहर जाऊँ मैं
बस एक तेरा साथ होने
न होने का इशारा तो मिले।
रोक दूँगा ख़ुद को सारे ज़माने से
कर फ़ैसला मंज़िल वही बनाने को।
विश्वास
उसकी चुनरी..!
एक रात दे रहा...
वो जो ख़फ़ा ह...
समुद्र एक कवि...
मेरा कुछ सामा...
एक और दामिनी
जय जवान जय कि...
महामारी
कोरोना वारियर...
मुझे हिचकी क्यों आती है हां बताओ तो, मुझे हिचकी क्यों आती है। मुझे हिचकी क्यों आती है हां बताओ तो, मुझे हिचकी क्यों आती है।
मेरे कर्मों के पारितोषिक से तुम मुझे आ मिले। गहन तिमिर के बाद आई सुनहरी सवेर से। मेरे कर्मों के पारितोषिक से तुम मुझे आ मिले। गहन तिमिर के बाद आई सुनहरी...
अपना हाले दिल उस खत में हमने लिखा पर पता लिखा ही नहीं और भेज दिया, अपना हाले दिल उस खत में हमने लिखा पर पता लिखा ही नहीं और भेज दिया,
मेरे अपनों से मिरा ना जानें कैसा बैर है जो अपने आप को हर दिन बिगाड़ता हूं मैं। मेरे अपनों से मिरा ना जानें कैसा बैर है जो अपने आप को हर दिन बिगाड़ता हूं मैं...
दिल हमने खोया इस तरह के जीते जी ना जी सके हम। दिल हमने खोया इस तरह के जीते जी ना जी सके हम।
आज से दूर हो रहे हो प्रियवर इन अंखियों का नूर बनके। आज से दूर हो रहे हो प्रियवर इन अंखियों का नूर बनके।
रात अकेली विरह सहेली करवट बदल रही है। रात अकेली विरह सहेली करवट बदल रही है।
अब मुझे भी बीता हुआ कल, भुलाने को जी चाहता है। अब मुझे भी बीता हुआ कल, भुलाने को जी चाहता है।
इन बातों मैं उलझता हूं। राहियों को तो तकता जाऊं, वो राही कहीं ना दिखता है। इन बातों मैं उलझता हूं। राहियों को तो तकता जाऊं, वो राही कहीं ना दिखता है...
हवा वह रही रात्रि सुन्दर है ,दीपको की लौ जगमग रही है , रात्रि की सुंदरता देखने योग्यहै हवा वह रही रात्रि सुन्दर है ,दीपको की लौ जगमग रही है , रात्रि की सुंदरता देखन...
कतरा- कतरा सी यादों में सिमट वापिस सब आता है। कतरा- कतरा सी यादों में सिमट वापिस सब आता है।
जब होता है पहला प्यार तब साथ होते है सभी यार! जब होता है पहला प्यार तब साथ होते है सभी यार!
खुदा ने जो सच्चे मन से पूरी की बस तू वो चाहत है। खुदा ने जो सच्चे मन से पूरी की बस तू वो चाहत है।
बहुत कुछ महसूस किया, पर हाले दिल कभी ना ज़ाहिर किया बहुत कुछ महसूस किया, पर हाले दिल कभी ना ज़ाहिर किया
ऐ जो बला आई है अब तो दूर से ही लोगों से मिलना होगा। ऐ जो बला आई है अब तो दूर से ही लोगों से मिलना होगा।
किताब के दो अलग पन्नों के बीच रखे दो अनमोल यादों का किस्सा ! किताब के दो अलग पन्नों के बीच रखे दो अनमोल यादों का किस्सा !
साज सिंगार की दुकान नहीं चाहिए मेरे लिए वो एक हमराही ही ठीक है। साज सिंगार की दुकान नहीं चाहिए मेरे लिए वो एक हमराही ही ठीक है।
हर पल बस खोती जाती हूँ, बस एकमय होती जाती हूँ।। हर पल बस खोती जाती हूँ, बस एकमय होती जाती हूँ।।
लेकिन समझते नहीं मेरी मजबूरियों को- फिर खुद को कैसे समझदार कहते हो। लेकिन समझते नहीं मेरी मजबूरियों को- फिर खुद को कैसे समझदार कहते हो।
लौटना नहीं चाहता मैं फिर भी लाचार हूँ क्या करूँ। लौटना नहीं चाहता मैं फिर भी लाचार हूँ क्या करूँ।