दोस्त
दोस्त
बिना आपके दोस्त हम अधूरे हैं
आपकी यादो में हो गये धतूरे हैं
अब तो हमसे मिलने आ दोस्त तू
जमाने ने कर दिये मेरे चूरे चूरे हैं
इस ज़माने ने बहुत जख़्म दिये हैं,
तेरी बातों से मेरे जख़्म दूर हुए हैं
तेरे जिंदगी में आ जाने मात्र से
हम भी जुगनू से दीपक हुए हैं
अब कोई मेरा क्या बिगाड़ेगा
कोई दर्द क्या मुझे तड़पायेगा
तू जब तलक मेरे पास है दोस्त
कोई क्या मुझे ज़रा भी सतायेगा
अमावस भी पूनम की रात है
जब तक दोस्त तू मेरे साथ है
आग भी को हंसकर पार करेंगे
दोस्त तेरा गर हाथ में मेरे हाथ है।
