दिल्ली का हाल
दिल्ली का हाल
दीवाली पर दीप जला,
मिठाई भी सबको खूब खिलाई
धूमधढाक कर पूरी रात सब
पटाखे-चक्री भी खूब चलाई
अनार-रॉकेट चला-चला कर,
वातावरण की धज्जियाँ उड़ाई||
जहरीली गैस का, चैंबर बना,
जनता की परेशानी खूब बढ़ाई
मरीजो की शामत, ला शहर में
पराली-बदली हवा पर, दोष लगाई,
पर करनी अपनी समझ ना आई ||
धुए से ढक गया है भानू, धूप का भी आगाज नहीं
खो गया कहीं, नीला आकाश भी
धुंध का बना, गुब्बार कहीं
बम-पटाखे के धुए में,
गुम हो गई खुशी कहीं ||
सांस-दमे के मरीजो ने,
अस्पतालो में जाकर लाइन लगाई
शांति से दिवाली मनाने की
सबने थी गुहार लगाई
बम पटाके उपयोग ना करना,
सरकार विज्ञापन भी खूब चलाई ||
पेड़-पौधे में रुचि नहीं तो, शुद्ध हवा फिर कहाँ से पाये
नए वाहन की खरीद पर रोक लगा
कारपुलिंग पर ध्यान लगायें
ऑड-ईवन योजना भी दिल्ली आई,
जनता को सारी सुकून दिलाई ||
