Divya Rathour
Classics
मेरे व्यक्तिव का रंग
कुछ ऐसा गहरा
कॉफी के ऐस्प्रेनो जैसा
जिसमें घुल जाता हर रंग
और निर्माण करता एक
नए मिठास भरे सवेरे का।
डार्क काफी
डार्क कांफी
कौन तुम्हें स...
सावन की झड़ी से महका चमन है घुंला फिजा में मोहब्बत का रंग है। सावन की झड़ी से महका चमन है घुंला फिजा में मोहब्बत का रंग है।
अपना कर्तव्य करो, सफलता आपके गोद में गिरेगी। अपना कर्तव्य करो, सफलता आपके गोद में गिरेगी।
देख आक्रमण इस भारत का, भागे गोरे चोर। आया शुभ दिन पंद्रह अगस्त, खूब मचा लो शोर। देख आक्रमण इस भारत का, भागे गोरे चोर। आया शुभ दिन पंद्रह अगस्त, खूब मचा...
बदनामी दी अफवाहों से बाधाओं का देकर झोंका। बदनामी दी अफवाहों से बाधाओं का देकर झोंका।
जिंदगी का सबसे प्यारा और न्यारा उपहार है दोस्ती ! जिंदगी का सबसे प्यारा और न्यारा उपहार है दोस्ती !
योगदान ये मुंशी जी का साहित्य का धरातल है। योगदान ये मुंशी जी का साहित्य का धरातल है।
कुछ बात ज़रूर है इसमें, कभी-कभी आंखें भी आंसू छुपाती है। कुछ बात ज़रूर है इसमें, कभी-कभी आंखें भी आंसू छुपाती है।
मैं साँस भरने से घबराता हूँ, जब मुट्ठी भर आतंकी के हाथों से, मैं खून से नहाता हूं। मैं साँस भरने से घबराता हूँ, जब मुट्ठी भर आतंकी के हाथों से, मैं खून से नह...
आसमान सी ऊंची रखो, मंजिल तुम्हें जरूर मिलेगी ! आसमान सी ऊंची रखो, मंजिल तुम्हें जरूर मिलेगी !
सर पे ही आ गिरे मासूमों पे उछाले हुए पत्थर। सर पे ही आ गिरे मासूमों पे उछाले हुए पत्थर।
है सुहाना दिवस शिव के नाम थम थम बरसे जो सावन लुभाया। है सुहाना दिवस शिव के नाम थम थम बरसे जो सावन लुभाया।
भारत मेरा विश्व गुरु है, ये सारी दुनिया कहती हो। भारत मेरा विश्व गुरु है, ये सारी दुनिया कहती हो।
जलाए कौन मेरे दिल 'का' आशियां 'बेघर', 'जो' दिलवाले 'हैं' उनके भू 'पे' घर नहीं होते। जलाए कौन मेरे दिल 'का' आशियां 'बेघर', 'जो' दिलवाले 'हैं' उनके भू 'पे' घर नही...
कलमबंद बयान नहीं जुबानी हलफनामा होती हैं। कलमबंद बयान नहीं जुबानी हलफनामा होती हैं।
है ईश्वर से यही प्रार्थना इस सिलसिले को बनाए रखना। है ईश्वर से यही प्रार्थना इस सिलसिले को बनाए रखना।
एक सच्चा दोस्त मिले जिसे, सचमुच उसका सोने सा नसीब होता है ! एक सच्चा दोस्त मिले जिसे, सचमुच उसका सोने सा नसीब होता है !
करले जो विश्वास तेरे पे, वो कभी भी जग से हारा नहीं। करले जो विश्वास तेरे पे, वो कभी भी जग से हारा नहीं।
बैरी चन्दा गगन में घटता-बढ़ता तुम बिन दिन-रात मावस हुए मेरे। बैरी चन्दा गगन में घटता-बढ़ता तुम बिन दिन-रात मावस हुए मेरे।
कोई कविता ना सही केवल नाम ही लिख दो वो "सुनहरे दिन" फिर से लौटा लाओ ना। कोई कविता ना सही केवल नाम ही लिख दो वो "सुनहरे दिन" फिर से लौटा लाओ ना।
जो चले उसके साथ तब तक कि जीवन की शाम ढल न जाए। जो चले उसके साथ तब तक कि जीवन की शाम ढल न जाए।