STORYMIRROR

AKIB JAVED

Inspirational

4  

AKIB JAVED

Inspirational

दास्ताँ अपनी सुनाओ तो सही

दास्ताँ अपनी सुनाओ तो सही

1 min
568

देख के तुम मुस्कुराओ तो सही

दिल में चाहत तुम जगाओ तो सही


दर हक़ीक़त हिज़्र की यूँ रात में 

वस्ल का वादा निभाओ तो सही


हो ज़ुलम की जितनी इंतेहा यहाँ

दास्ताँ अपनी सुनाओ तो सही


मुद्दतों से नींद आती अब नही

सपने में तुम अब बुलाओ तो सही


दर्द भी मेरा मुझे मंज़ूर है अब

ज़ाम नज़रों से पिलाओ तो सही


अब्र में यूँ टिमटिमाता तारा हूँ

सब्र को तुमआज़माओ तो सही


छल कपट दिल से निकालो यारों अब

दोस्ती दिल से निभाओ तो सही।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational