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Arsh Khan

Tragedy

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Arsh Khan

Tragedy

Covid ki mahamaari

Covid ki mahamaari

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कोई तो किश्त है जो शायद अदा नहीं है

साँस बाक़ी है और हवा नहीं है


नसीहतें, सलाहें, हिदायतें तमाम

पर्चे पर है, पर दवा नहीं है


आँख भी ढक लीजिये संग मुँह केमं

ज़र सचमुच अच्छा नहीं है


रक्त बिका, पानी बिका, आज बिक रही है हवा

कुदरत का ये तमाचा बेवजह नहीं है


हरेक शामिल है इस गुनाह में

क़ुसूर किसी एक का नहीं है


वक्त है अब भी ठहर जाओ

वक्त है अब भी ठहर जाओ


अभी सब कुछ लुटा नहीं है।


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