चलता चल
चलता चल
जिस पथ पर काँटे हों,
उनको निकाल कर चलता चल
जहां चाह है वहाँ राह है,
इस गीत को गाता चलता चल।
जब दर्द हो गंभीर,
वो दर्द भुलाता चलता चल।
जिस पथ पर काँटे हों,
उनको निकाल कर चलता चल।
जब हट जाएं निगाहें राह से,
तू राह दिखाता चलता चल।
गिर जाए तू अपनो की नजरों में,
तू खुद को उठाता चलता चल।
अगर राह हो कठिन, छूटे सभी
तू हिम्मत दिखाता चलता चल।
जिस पथ पर काँटे हों,
उनको निकाल कर चलता चल।।
मिल जाए तो राख में,
पर उनकी सोच को बदलता चल।
दिल भींच दे जो आवाज़,
उस आवाज़ को बुलंद कर चलता चल।
जिस पथ पर काँटे हों,
उनको निकाल कर चलता चल।
