STORYMIRROR

robin tejpal

Inspirational

3  

robin tejpal

Inspirational

चलो लबों पे हंसी उगाएं

चलो लबों पे हंसी उगाएं

1 min
343

चलो लबों पे हंसी उगाएं 

गुज़र रहे हैं जो लम्हे उनसे 

खुशी के बीजों को हम निकाले 

और गर पङती हैं आँखे नम तो 

उन्हे आँसुओ से सींच डालें 

माना हो कैद वक़्त के दायरों में 

मुलाज़िमत के इन बंधनों में 

है छीनी मगर ये मुसकान किसने 

जो इतने संजीदा हो गये हो

किस बोझ से रंजीदा हो गये हो 

ये चोगा नकली है फेंक डालो

सोया हुआ बचपना जगालो

चलो मोहल्ले की सांझा छत पे

वो बिखरे हुए मांझो की फलक पे

कोई पुरानी पतंग निकाले

और उससे बाकियों को काट डाले

गलियों में दौङे फिर लङ झगङ के 

कटी पतंगो को लूट लाए

बेपरवाह बेबाक कहकहों से 

जो छूटी थीं यारियां निभाए 

चलो लबों पे हंसी उगाएं ।




विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational