चिंता मत कर
चिंता मत कर
दुनिया में चिंता मत कर तू प्यारे
फिर से लौट आयेगी तेरी बहारें
चंद ठोकरों से क्या घबराता है
तुझे तो शूलों पे चलना आता है
जग-दलदल में तुझे तो साखी
कमल बनना बहुत ही भाता है
फिर से सजेगी फूलों से राहें
दौड़ता रह तू फैलाकर बाहें
दुनिया में चिंता मत कर तू प्यारे
फिर से लौट आयेगी तेरी बहारें
लोगों को तानों को तू जान ले
अपने हुनर को तू अभिमान दे
ले चल कश्ती तूफानों के किनारे
तुझे है हौसला के बड़े ही सहारे
ज़माने को अपना दम दिखा दे,
तुझमें है, सूर्य के उजाले बहुत सारे
दुनिया में चिंता मत कर तू प्यारे
फिर से लौट आएगी तेरी बहारें
कोरे एक स्वप्न के टूट जाने से,
मत समझ तुझे न मिलेंगे किनारे
उठ खड़ा हो, कर पुरुषार्थ ऐसा,
दांतो में उंगली दबाने लगे सारे
