छोटे शहर की लड़की
छोटे शहर की लड़की
मैं एक छोटे शहर की लड़की
रहती हमेशा पैसों की कड़की
पर मान में आए न कोई आँच
रखती हर कदम सोच जाँच
पापा ने सिखाया मेहनत कर कमाना
मम्मी ने सिखाया इज़्ज़त कर कमाना
रखती दोनों की सीख का मान
रखती अपने सपनों का भी मान
छोटे से हैं सपने मेरे
रहते मेरे मन को घेरे
कैसे उनको बनाऊँ सर का ताज
उनको इकट्ठा कर बनाऊँ कल आज
माना अपने सपने पूरे करने हैं
पर अपने पाँव जमीं पर ही धरने हैं
अपनों को संग लेकर चलना हैं
परायों को अपनाकर चलना हैं
बस और कुछ नहीं
माँ-बाप का ही सही
ख़्वाब पूरा करना है
तकदीर को बदलना है
मैं एक छोटे शहर की लड़की
अपनी औकात जानती हूँ
सब कुछ तो बदल नहीं सकती
माँ-बाप की तकदीर बदलना चाहती हूँ
मैं छोटे शहर की लड़की
छोटी सी दुनिया मेरी
थोड़ी सी ख़ुशियाँ मेरी
छोटी सी जिंदगी मेरी.....
