STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract

4  

Sudhir Srivastava

Abstract

चौपाई छंद - रिश्ता/रिश्ते

चौपाई छंद - रिश्ता/रिश्ते

1 min
0

चौपाई छंद - रिश्ता / रिश्ते रिश्ता रखिए अपना पावन। जीवन होगा तब मनभावन। पड़े इसे क्यों कभी परखना। रिश्ता ऐसा बने लुभावन।। रिश्ता नहीं दिखावा होता। दुख में सँबल बीज है बोता।। रिश्ते खुशियां मिलकर बाँटें। गलत राह पर मारे चाँटे।। जन्म मृत्य का खेल निराला। रिश्ता देता हमें उजाला।। हर रिश्ते की अलग कहानी। बतलाती हैं दादी-नानी।। हर रिश्ता न खून का होता। कभी इसे मानव मन बोता।। रिश्ता विविध रंग फुलवारी। सुख-दुख की होती है क्यारी।। रिश्ता नहीं सदा सुख सागर। दुख का भी ये भारी गागर।। प्रेम भाव रिश्ते भी चाहें। मर्यादा के साथ निबाहें।। रिश्तों का आधार है प्यारा। समझ रहा इसको संसारा।। रिश्ता बिन है जगत अधूरा। जीवन लगता जैसे चूरा।। रिश्ता भाव बड़ा है भारी। बहुत जरूरी इनसे यारी।। जीवन को आयाम दें रिश्ते। कभी बंदकर रख मत बस्ते।। सुधीर श्रीवास्तव


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract