STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract

4  

Sudhir Srivastava

Abstract

चौपाई छंद - मात-पिता की सेवा

चौपाई छंद - मात-पिता की सेवा

1 min
1

चौपाई छंद - मात-पिता की सेवा माता पिता की कर ले सेवा। खायेगा  तू   मिश्री   मेवा।। मान ले  प्यारे  मेरा कहना। जीवन का ये सुंदर गहना।। सबके  कहाँ  नसीब  में  होता। जान-बूझकर तू  क्यों  खोता।। भाग्य-भाग्य  की अलग कहानी। जिसे    सुनाती    दादी-नानी।। धरती  पर  जबसे  वो  लाए। आप स्वयं  को हैं  बिसराए।। बच्चों खातिर दिन भर खटते। फिर भी कभी नहीं है थकते।। जीवन  का  आधार  हैं  बच्चे। कहते  सदा मात-पितु सच्चे।। समय  खेलता  खेल  निराला। जिसने हमको दिया निवाला।। आई  आज   हमारी  बारी। बूढ़े  हुए  पिता  महतारी।। नहीं  करो  सेवा  उपकारी। कर्ज़ मुक्त कब हो संसारी।। ईश्वर कृपा मातु-पितु साथा। नहीं  पीटिए  अपना माथा।। सबसे  बड़े  मातु-पित देवा। सेवा  करके  खाओ  मेवा।। अपना  जीवन  धन्य  बनाओ। इनका दिल न कभी दुखाओ।। सारे   तीर्थ   इन्हीं  चरणों  में। आप  बसा लो  रोम-रोम  में।। यमराज मित्र का मानो कहना। आशीषों  का  पाओ  गहना।। सेवाव्रती   आप   कहलाओ। अपना जीवन धन्य बनाओ।। सुधीर श्रीवास्तव  


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract