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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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आरंभ करते हैं

आरंभ करते हैं

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आरंभ करते हैं आइए! नया आरंभ करते हैं नव संकल्प का जयघोष करते हैं। कम से कम कुछ तो नव आरंभ करते हैं हृदय की वेदना के पार चलते हैं। एक नया इतिहास रचते हैं हार-जीत से कोसों दूर चलते हैं। आशा-निराशा के लफड़े में नहीं फँसते है अपने दम पर नींव मजबूत कर आलीशान महल खड़ा करने का आज और अभी से नव आरंभ करते हैं। अपने काँधे को मजबूत करते हैं एक जिम्मेदार पुत्र, पिता, पति और जिम्मेदार नागरिक बनते हैं, नव आयाम के नव आरंभ का आधार बनते हैं। सुधीर श्रीवास्तव 


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