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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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फायकू- मजदूर दिवस

फायकू- मजदूर दिवस

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फायकू - मजदूर दिवस  ********** मनाते हैं मजदूर दिवस  दशा पर दृष्टि  तुम्हारे लिए।    व्यर्थ है मजदूर दिवस  कितना बदलाव आया  तुम्हारे लिए।  हालत मजदूर की देखी  भला समझे कितना   तुम्हारे लिए।  चिंतित रहता हमारा श्रमिक  भविष्य की चिंता  तुम्हारे लिए।  कितना कुछ कर रही  देश की सरकार  तुम्हारे लिए। बेबस, लाचार, मजबूर वर्ग  सुविधा भी मिले  तुम्हारे लिए।  कितना कुछ हो गया  जिन्हें पता नहीं  तुम्हारे लिए।  थका हारा उम्मीद लिए  हारता नहीं सकता  तुम्हारे लिए।   माटी के सच्चे सपूत  गौरव गाथा भारी  तुम्हारे लिए। सबका जो पेट भरते  तन मन जलाकर  तुम्हारे लिए। तपती धूप की चिंता  कब करता वो तुम्हारे लिए। चिंता भला कहाँ करता  श्रमिक कभी अपना तुम्हारे लिए। थका हारा घर आता  कल की चिंता  तुम्हारे लिए। देश आगे बढ़ता रहे परिवार संग पलें तुम्हारे लिए। जिम्मेदारी सिखाता अनपढ़ मजदूर  बिना डिग्री के तुम्हारे लिए। इन्हें भी स्थायित्व चाहिए  मजबूरी नहीं अधिकार  तुम्हारे लिए। उम्मीदों के साए में  जीने की विवशता  तुम्हारे लिए। कर्म जिसकी पूजा साधना  अविरल बहता पसीना  तुम्हारे लिए। इनका साथ सब देते  सिर्फ शोर करते  तुम्हारे लिए। दिवस की जरूरत क्या  जीवन सुरक्षा चाहिए  तुम्हारे लिए। सुधीर श्रीवास्तव  


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