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Varsha Sharma

Abstract

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Varsha Sharma

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बसंत आया हरे हरे

बसंत आया हरे हरे

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बसंत आया हरे-हरे

बसंत आया हरे-हरे

बसंत आया मेरे द्वार


पद्मासन पर देखो वीणा

वादिनी रही विराज,

अपने तारों से मन के

मंदिर को आलोकित कर दे

पूरे आर्यवर्त में बिखरे

माँ भारती की बहार


बसंत आया हरे-हरे

बसंत आया हरे हरे

बसंत आया मेरे द्वार


तम का कर देगी वो नाश

ऐसा है मन में विश्वास

हंस वाहिनी वायु वेग से करेगी,

कूप मंडूक को का नाश

सब जिज्ञासा को करेगी शांत

उस ज्योति की ऐसी चमकार


बसंत आया हरे हरे

बसंत आया हरे हरे

बसंत आया मेरे द्वार


हुआ पीत- पीतांबर सारा संसार,

सरसों के फूलों में बहार,

विद्या बुद्धि का मिले वरदान,

पीली लड्डू पीली मिठाई

खूब खिलाओ अब की बार


बसंत आया हरे हरे

बसंत आया हरे

बसंत आया मेरे द्वार


पाषाण को पिघलाकर ज्ञान की

सरिता बहा देना,

मेरा अभिवादन कर लो

माँ स्वीकार,

अभिनंदन करते हैं हम सब

उसका बारंबार


बसंत है आया हरे हरे

बसंत आया हरे हरे

बसंत आया मेरे द्वार


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