Sudhir Srivastava
Children
बैठे हो मुंडेर पर क्यों?
पास नहीं आते हो क्यों?
दाँत दिखाते गुस्से में क्यों?
हमें डराते चख चख कर क्यों?
नीचे आओ बंदर जी
रोटी खाओ बंदर जी,
फिर तुमको अंगूर खिलाऊँ
तुमको अपना दोस्त बनाऊँ।
आधार बाला छंद...
ग़ज़ल - हमको ...
दीप्ति छंद -म...
मुक्तक
चौपाई छंद
जयकरी छंद
चौपाई - श्रमि...
हँसना मना है
जीने के लिए
मैं बेवकूफ हू...
जब नन्हे - नन्हे पावों से चल, पास वो मेरे आते हैंं । हौले से कानो में मेरे। जब नन्हे - नन्हे पावों से चल, पास वो मेरे आते हैंं । हौले से कानो में मेरे...
मेरा बचपन, मेरे सपनों में ही रह गया...! मेरा बचपन, मेरे सपनों में ही रह गया...!
माँ से सुन तारीफ इतनी मेरा मन कुछ बदला, सोचा खा लेती हूँ माना बहुत है कड़वा। माँ से सुन तारीफ इतनी मेरा मन कुछ बदला, सोचा खा लेती हूँ माना बहुत है कड़व...
हम बच्चों को है याद आता, हमारा प्यारा-प्यारा सा स्कूल। हम बच्चों को है याद आता, हमारा प्यारा-प्यारा सा स्कूल।
नहीं चाहिए थी गाड़ी, बस, और न वायुयान। उड़ते-उड़ते ही लख लेती, सारा हिन्दुस्तान। नहीं चाहिए थी गाड़ी, बस, और न वायुयान। उड़ते-उड़ते ही लख लेती, सारा हि...
'गिल्ली से घरों के काँच तोड़ना,कंचों से दोस्तों के कंचें फोड़ना, पतंगों से घरों की ऊंचाई नापना, बचपन क... 'गिल्ली से घरों के काँच तोड़ना,कंचों से दोस्तों के कंचें फोड़ना, पतंगों से घरों की...
यह कविता आपको अपने बचपन की याद दिलाएगी । यह कविता आपको अपने बचपन की याद दिलाएगी ।
क्या अब भी मेरी बॉल वहीं फ्रिज पर रखी रहती है क्या मेरी यूनिफॉर्म अभी भी, खूंटी पे टँगी रहती है क्या अब भी मेरी बॉल वहीं फ्रिज पर रखी रहती है क्या मेरी यूनिफॉर्म अभी भी, खूंटी...
आये जो कोई आँच देश पर हम अपनी जान लुटा देंगे आये जो कोई आँच देश पर हम अपनी जान लुटा देंगे
पाकर तुझे खोना दर्द बहुत होता है अविस्मरणीय यादों से तूने जोड़ दिया नाता है पाकर तुझे खोना दर्द बहुत होता है अविस्मरणीय यादों से तूने जोड़ दिया नाता है
पूछे हमारा हाल दें हमें सम्मान पर थी नादानी यह हमारी, नासमझी अपनी पूछे हमारा हाल दें हमें सम्मान पर थी नादानी यह हमारी, नासमझी अपनी
कैसे बिठायें कंप्यूटर के समक्ष, एकाग्रता बच्चों की खो रही है कैसे बिठायें कंप्यूटर के समक्ष, एकाग्रता बच्चों की खो रही है
लॉकडाउन से पहले विनती होती मम्मी से हमारी, कभी तो छुट्टी भी करा दो ओ मम्मी मेरी प्यारी लॉकडाउन से पहले विनती होती मम्मी से हमारी, कभी तो छुट्टी भी करा दो ओ मम्मी मे...
तू क्या जाने भेद इस जग का, मैं हर कण का ज्ञान दिलाऊंगी। तू नन्हीं सी चिड़िया मेरी। तू क्या जाने भेद इस जग का, मैं हर कण का ज्ञान दिलाऊंगी। तू नन्हीं सी चिड़िया मे...
तूने अपना संसार बसाया फिर अपना परिवार बढ़ाया अपनी खुदगर्जी के ख़ातिर तूने मेरा खून बहा तूने अपना संसार बसाया फिर अपना परिवार बढ़ाया अपनी खुदगर्जी के ख़ातिर तूने...
मिल सकता है तुम को भी आदर और सम्मान। मिल सकता है तुम को भी आदर और सम्मान।
नई पौध के नौनिहालों , सीख लो तुम भी पेड उगाना ! नई पौध के नौनिहालों , सीख लो तुम भी पेड उगाना !
प्रातःकाल में जो प्रतिदिन, प्रेरित कर हमें जगाता है। प्रातःकाल में जो प्रतिदिन, प्रेरित कर हमें जगाता है।
उनके जाने से मानो गिल्लू थी बहुत उदास अब न वो कमरे में आती और न खिड़की के पास।। उनके जाने से मानो गिल्लू थी बहुत उदास अब न वो कमरे में आती और न खिड़की के पा...
एक मांँ ही समझती है, अपनी संतान को कैसे पालती है वो...! एक मांँ ही समझती है, अपनी संतान को कैसे पालती है वो...!