Sudhir Srivastava
Children
बैठे हो मुंडेर पर क्यों?
पास नहीं आते हो क्यों?
दाँत दिखाते गुस्से में क्यों?
हमें डराते चख चख कर क्यों?
नीचे आओ बंदर जी
रोटी खाओ बंदर जी,
फिर तुमको अंगूर खिलाऊँ
तुमको अपना दोस्त बनाऊँ।
कुण्डलिया
दोहा
कुण्डलिनी छंद...
मुक्तक
रोला छंद
चौपाई छंद - च...
दोहा गीत -गठब...
चौपाई छंद - प...
देश की खातिर वह कभी अपने जान की परवाह कहां करता है देश की खातिर वह कभी अपने जान की परवाह कहां करता है
जिसको जो मन चाहे ले जाए, हाथ पैर या पेट उठाए सर और धर जो उठाएगा, जिसको जो मन चाहे ले जाए, हाथ पैर या पेट उठाए सर और धर जो उठाएगा,
आओ आओ सखियों तुमको मेरी कहानी सुनाऊं। आओ आओ सखियों तुमको मेरी कहानी सुनाऊं।
अरे, नारी के सम्मान की खातिर राजनीति का त्याग करो नेता से पहले बाप बनो फिर अपनी बेटी याद करो।। अरे, नारी के सम्मान की खातिर राजनीति का त्याग करो नेता से पहले बाप बनो फिर अपन...
हम बच्चों को है याद आता, हमारा प्यारा-प्यारा सा स्कूल। हम बच्चों को है याद आता, हमारा प्यारा-प्यारा सा स्कूल।
'गर हम पढ़ लिख बोलें हिन्दी, बने विश्व की भाषा मानो।। 'गर हम पढ़ लिख बोलें हिन्दी, बने विश्व की भाषा मानो।।
क्या अब भी मेरी बॉल वहीं फ्रिज पर रखी रहती है क्या मेरी यूनिफॉर्म अभी भी, खूंटी पे टँगी रहती है क्या अब भी मेरी बॉल वहीं फ्रिज पर रखी रहती है क्या मेरी यूनिफॉर्म अभी भी, खूंटी...
जीवन में अचानक एक प्रकाश है, क्योंकि ईश्वर हमेशा हमारे साथ हैं ।। जीवन में अचानक एक प्रकाश है, क्योंकि ईश्वर हमेशा हमारे साथ हैं ।।
मेरा अंश भी बोले, फिर यही गोद और यही मां मिले। मेरा अंश भी बोले, फिर यही गोद और यही मां मिले।
बालक अगर हिंदी बोले तो उस पर फाइन लगाते हैं, और फिर भी गर्व से हिंदी दिवस मनाते हैं, बालक अगर हिंदी बोले तो उस पर फाइन लगाते हैं, और फिर भी गर्व से हिंदी दिवस मना...
पकड़े जाने पर, मम्मी की पड़ती डांट ज़ोरदार, साथ में फ्री के मिलते थे पकड़े जाने पर, मम्मी की पड़ती डांट ज़ोरदार, साथ में फ्री के...
अब यह कैसा मंजर दिखलाया, छाया विश्व में कोविड का सायाI अब यह कैसा मंजर दिखलाया, छाया विश्व में कोविड का सायाI
पीना मुश्किल हुआ है देखो, नल से कब जल आयेगा। पीना मुश्किल हुआ है देखो, नल से कब जल आयेगा।
आज ये एक दुःख़द कल्पना है बच्चों ,तुमसब बच्चे यदि न चेते तो ये कजल की भयवाह सच्चाई है ,अपने जीवन में... आज ये एक दुःख़द कल्पना है बच्चों ,तुमसब बच्चे यदि न चेते तो ये कजल की भयवाह सच्च...
माता पिता की बच्चों से बढ़ती आशा, बच्चों की कुछ करने की अभिलाषा, माता पिता की बच्चों से बढ़ती आशा, बच्चों की कुछ करने की अभिलाषा,
नई पौध के नौनिहालों , सीख लो तुम भी पेड उगाना ! नई पौध के नौनिहालों , सीख लो तुम भी पेड उगाना !
बेटियाँ इन्हें कमजोर न समझो बहुत मजबूत होती है बेटियां। बेटियाँ इन्हें कमजोर न समझो बहुत मजबूत होती है बेटियां।
प्रभाकर का उदय भी प्रतिदिन ही होगा... चाँद की चमक भी कायम रहेगी... प्रभाकर का उदय भी प्रतिदिन ही होगा... चाँद की चमक भी कायम रहेगी...
दुनिया भर का प्यार, दुलार, वात्सल्य ये अपने साथ लाई है दुनिया भर का प्यार, दुलार, वात्सल्य ये अपने साथ लाई है
बचपन न रहा तब सुखकर जब आया सन् पचहत्तर, क्रूरता की सीमा पार बचपन न रहा तब सुखकर जब आया सन् पचहत्तर, क्रूरता की सीमा पार