Sudhir Srivastava
Children
बैठे हो मुंडेर पर क्यों?
पास नहीं आते हो क्यों?
दाँत दिखाते गुस्से में क्यों?
हमें डराते चख चख कर क्यों?
नीचे आओ बंदर जी
रोटी खाओ बंदर जी,
फिर तुमको अंगूर खिलाऊँ
तुमको अपना दोस्त बनाऊँ।
निकृष्टता का ...
दोहा
दोहा गीत - जन...
मौन साधकर बैठ...
स्वार्थ का सि...
जिसको जो मन चाहे ले जाए, हाथ पैर या पेट उठाए सर और धर जो उठाएगा, जिसको जो मन चाहे ले जाए, हाथ पैर या पेट उठाए सर और धर जो उठाएगा,
बाग़ में जब तक उसे न देख लूँ मेरी सुबह की सैर जैसे अधूरी है। बाग़ में जब तक उसे न देख लूँ मेरी सुबह की सैर जैसे अधूरी है।
अरे, नारी के सम्मान की खातिर राजनीति का त्याग करो नेता से पहले बाप बनो फिर अपनी बेटी याद करो।। अरे, नारी के सम्मान की खातिर राजनीति का त्याग करो नेता से पहले बाप बनो फिर अपन...
फिर इक रोटी और दो बूंद पानी का दाम ये पैसा चुका ना पाएगा, फिर तिरस्कृत और अक्षम्य मनुष फिर इक रोटी और दो बूंद पानी का दाम ये पैसा चुका ना पाएगा, फिर तिरस्कृत और अक्...
हम बच्चों को है याद आता, हमारा प्यारा-प्यारा सा स्कूल। हम बच्चों को है याद आता, हमारा प्यारा-प्यारा सा स्कूल।
देश देखता राह तुम्हारी बच्चों भारतवर्ष के, मेहनत और परिश्रम से उन्नति ले आओ अर्श से। देश देखता राह तुम्हारी बच्चों भारतवर्ष के, मेहनत और परिश्रम से उन्नति ले आओ ...
क्या अब भी मेरी बॉल वहीं फ्रिज पर रखी रहती है क्या मेरी यूनिफॉर्म अभी भी, खूंटी पे टँगी रहती है क्या अब भी मेरी बॉल वहीं फ्रिज पर रखी रहती है क्या मेरी यूनिफॉर्म अभी भी, खूंटी...
गया था चूहा इक दिन खाने अनाज बाजार में! गया था चूहा इक दिन खाने अनाज बाजार में!
बिन मेहनत के हासिल तख़्त-ओ-ताज नहीं होते। बिन मेहनत के हासिल तख़्त-ओ-ताज नहीं होते।
Like my peers, I may not be talented My progress may be slow Like my peers, I may not be talented My progress may be slow
जो ऊपर गतिमय भीतर शांत रहेगा वहीं समंदर कहलाएगा । जो ऊपर गतिमय भीतर शांत रहेगा वहीं समंदर कहलाएगा ।
माता पिता की बच्चों से बढ़ती आशा, बच्चों की कुछ करने की अभिलाषा, माता पिता की बच्चों से बढ़ती आशा, बच्चों की कुछ करने की अभिलाषा,
बुद्धिमान हैं छोटे लाल यह था उनका सबसे बड़ा कमाल। बुद्धिमान हैं छोटे लाल यह था उनका सबसे बड़ा कमाल।
गाँधी बापू का था यह सपना, बना ना सके जिसे अभी तक हम अपना।।। गाँधी बापू का था यह सपना, बना ना सके जिसे अभी तक हम अपना।।।
जिंदगी के इस सफर में मैंने उससे सीखा है। जिंदगी के इस सफर में मैंने उससे सीखा है।
बच्चों देखो यह दुनिया कितनी रंगीन, बंधकर जीवन में मत करो इसे संगीन। बच्चों देखो यह दुनिया कितनी रंगीन, बंधकर जीवन में मत करो इसे संगीन।
कितने सुंदर लगते हैं ये , पके पके से आम। तोतापरी दशहरी लंगड़ा , कर्नाटक बादाम। कितने सुंदर लगते हैं ये , पके पके से आम। तोतापरी दशहरी लंगड़ा , कर्नाटक...
थोड़ी सी थी, उदास ज़रूर, परी से विदा होने पर, किन्तु माला देख, खुशी से भरने लगी किलक थोड़ी सी थी, उदास ज़रूर, परी से विदा होने पर, किन्तु माला देख, खुशी से भरने ...
शिक्षक एक प्रवाह है । मंज़िल नहीं राह है ।। शिक्षक पवित्र है। शिक्षक एक प्रवाह है । मंज़िल नहीं राह है ।। शिक्षक पवित्र है।
चलो ना ! ले चलते हैं अपने साथ प्यारा-सा ये बादल। चलो ना ! ले चलते हैं अपने साथ प्यारा-सा ये बादल।