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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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फायकू-होली

फायकू-होली

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फायकू - होली  ********** रंग अबीर गुलाल सब उत्साह से भरे तुम्हारे लिए। हमारी आज या कल नाम थी होली  तुम्हारे लिए। रंग अबीर पुते चेहरे  गुझिया कचरी पापड़  तुम्हारे लिए। प्रेम प्यार सद्भाव का संदेश होली लाया  तुम्हारे लिए। होली के हुड़दंग में  रिश्तों की मर्यादा  तुम्हारे लिए। होली की आड़ में  चढ़ गई भंग तुम्हारे लिए। रंग अबीर गुलाल फाग कहाँ जाये भाग  तुम्हारे लिए। बजाओ रे ढोल नगाड़े  हम भी नाचेंगे  तुम्हारे लिए। रंगों का सतरंगी पर्व  भाने लगा है  तुम्हारे लिए। थोड़ा सा पी लूँ आज होली है तुम्हारे लिए। मिटाए सब गिले शिकवे गले मिल आज तुम्हारे लिए। कितना कुछ लेकर आया  आज होली में  तुम्हारे लिए। श्रद्धा से शीश झुका सबका आशीष लिया  तुम्हारे लिए। भाईचारा, सौहार्द, एकता का प्रतीक होली है  तुम्हारे लिए। खुशियाँ आई हैं फिर  होली मिलन द्वार तुम्हारे लिए। सुधीर श्रीवास्तव  


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