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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

भारत माँ का बेटा

भारत माँ का बेटा

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खिलते हुए फूल को छोड़कर आये है

बूढ़े मां-बाप को ऐसे ही छोड़ आये है

हम भारत के मां वो मजबूर बेटे है,

अपनी माँ को बिलखता छोड़ आये है


किसे हम अपनी मजबूरी बताये साखी,

फ़ौलादी जिगर को रोते हुए छोड़ आये है

हम हिंदुस्तान की सीमाओं के रक्षक है,

अपने देश के लिये सांसे छोड़ आये है


दुनिया में कोई हमें पागल कहता है,

दुनिया में कोई हमें दीवाना कहता है,

पर हम तो इस भारत मां के लाडले है

मातृभूमि की हिफाज़त करने आये है


एक मेरी माँ के लिये न है, ख़्वाब मेरा

पूरे देश की माँ के लिये जहान है, मेरा

माँ के लिये जान न्यौछावर करने आये है

बुरी नज़रवालों की आंखें नोचने आये है


बस मेरा साखी यहां एक ही दुखड़ा है

भीतर रोता मेरी भारत मां का मुखड़ा है

बस मुझे तो चंद दिनों की मोहलत दे, दे

देश के गद्दारों को जिंदा दफ़नाने आये है



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