भाई-बहेन दूज
भाई-बहेन दूज
है ये त्योहार भाई-बहन का,
इन्तेज़ार करते भाई-बहन कबसे भाई-बहन दूज आने का ।
इसलिए तो आते ही भाई पूछती है बहने-- बताओ लाए हो क्या तौफा हमारे हिस्से का ?
बहेने होती है भाईओ की बड़ी लाडली,
बड़ी शान से तिलक करती है ये भाईओ की सोचकर ये की करेंगे उनके भाईओ मुसीबतो मे उनकी रखवाली।
ना जाने काजु बर्फी, लड्डू के साथ मिलते है कितने तरह तरह की मिठाईया खाने को ,
आखिर एक बहेन ही तो है जो खुशियो से भर देती हे सबको ।
भाई-बहन का रिश्ता होता है बहोत आनमोल,
भाईओ का कोहिनूर होती है बहेने इसलिए तो कोई भी चीज़ चुका ही नही सकती उनका मोल ।
है ये त्योहार भाई-बहन का,
मिलन हो सभी बिछरे हुए भाई-बहनो का
क्यूंकी सबसे खूबसूरत सा प्यारा रिश्ता होता हे एक भाई ओर एक बहन का ।। ।।
