भाग्य
भाग्य
आवश्यकता है कर्म की, साहस और परिश्रम की
भाग्य भरोसे मत रहना
चलो राह परिश्रम की अपनानी है
बढ़ना जो चाहे आगे, शुरुवात आज ही कर
जो पाना लक्ष्य अपना, पर अपने बलबूते पर
भाग्य भरोसे मत रहना
तुझे अभी अपने प्रयासो से सफ़लता पानी है
कामचोर आलस्य के कारण मान भाग्य न पड़े रहना
मेहनत करके बढ़ना, आगे करना अपना नाम
बढ़ते जाना न लेना भाग्य का नाम
उम्मीद पर ही दुनिया कायम अपनी कोशिश जारी रखनी है
बार- बार गिरकर चीटियां भी धरा पर अपनी मंजिल पाती है
आज की तेरी पराजय ही कल की जीत की उम्मीद जगाती है
जैसे हर रात के बाद भी प्रतिदिन उजाला होता है
डगमगाते उस क्षण में उम्मीद का दीपक जलता है
मत हो हताश तू रख विश्वास
जीवन में अवरुद्ध मार्ग पर मझधार फंसी
उस नाव को उम्मीद का किनारा पाना है
तू उम्मीद रख न हो उदास
राह तुझे बनानी है
जीवन में जो पाना है
तुझे उस मंजिल की आशा जगानी है।
