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Shaeqa Razzaqi

Romance

4  

Shaeqa Razzaqi

Romance

बेवफा

बेवफा

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200

जो था मेरा वो हो गया जुदा

दिल वो तोड़ गया ऐ मेरे ख़ुदा


जलता है ये दिल मेरा और मैं

होती हूँ ख़ाक़ क्यों ऐ मेरे ख़ुदा


टिप टिप बहते हैं आंखों से आंसू

मन भी रोये जाये मेरा ऐ मेरे ख़ुदा


दिल में ख़लिश है मचलती मेरे

कैसे भूलाऊं उसे मैं ऐ मेरे ख़ुदा


राते हो गयीं हैं मेरी तन्हा अकेली

डसते हैं ख्वाब मुझको ऐ मेरे ख़ुदा


इन आंखों में प्यासे ख्वाब बोते हैं

वो मेरा ख्वाब नहीं है ऐ मेरे ख़ुदा


आंखों में याद उसकी पिघलती है

रूठ गये वो छूट गये ऐ मेरे ख़ुदा


ढूँढती हैं मेरी निगाहें उस बेवफ़ा को

जिसने तोड़ा है मेरा दिल ऐ मेरे ख़ुदा


बन गया है वो क्यों आज अजनबी 

जाने ना मुझे पहचान ना ऐ मेरे ख़ुदा


मेरे प्यार को उसने यूँ भुला दिया

दर्द कैसा उसने मुझे दिया ऐ मेरे ख़ुदा


प्यार नहीं वो क्या इक प्यास था 

मेरे लिए तू ही बता ऐ मेरे ख़ुदा


दुआ है मेरी भला हो तेरा ओ बेवफ़ा

रख सलामत और खुश उसे ऐ मेरे ख़ुदा 


            




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