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Vaibhavi Sawant

Abstract


4.5  

Vaibhavi Sawant

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बेटी

बेटी

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घर का बोझ नही हैं बेटी,

ये परंपरा हैं झूठी


बेटा बजाये गली - गली में सिटी,

उससे नहीं मिलती है रोटी


सबको पता है, बेटी में नहीं कोई कमी,

फिर न जाने, कोई क्यो न देता इसकी हमी


करने दो उनको भी उड़ने की तैयारी,

फिर देखो चमकेगी ये भारत की नारी।


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