STORYMIRROR

Anil Gupta

Inspirational

4  

Anil Gupta

Inspirational

बदनसीबी

बदनसीबी

1 min
378

यह समय नही है 

अपने घाव दिखाने का

किसी को 

दिलचस्पी नही है

तुम्हारी परेशानी जानने में

तुम्हे क्या लगता है 

बदनसीबी 

सिर्फ तुम्हारे ही पीछे पड़ी है 

नही जनाब 

यहाँ सब 

अपने अपने 

हिस्से की तकलीफ 

भोग रहे है 

सच बताना 

जब अपने हिस्से की खुशी 

तुम्हारी झोली में आई थी 

तब तुमने 

किस किस का 

दुःख बाटा था 

जिस सड़क से चलकर 

तुम यहाँ तक आए हो

उसी से जुड़े फुटपाथ पर

कड़कड़ाती ठंड में 

दर्द से बिलखते कई लोग

भूखे सो जाते है 

उस अनुपात में 

तुम्हारी तकलीफ 

कुछ नही है 

इसीलिए जाओ मित्र

जाओ और सो जाओ

क्योंकि

यह मुनासिब समय नही है 

किसी को 

अपनी तकलीफ़ बताने का !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational