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Zalak bhatt

Tragedy Classics Fantasy

3  

Zalak bhatt

Tragedy Classics Fantasy

बदली

बदली

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* आज से मेरी रचना जो सुरबद्ध की हुई है।

*उन्हें प्रकाशित करने जा रही हूं।

*आशा है आप सभी को पसंद आये।

     
                      

* सा... ग.... म....प..... -2

* प, म, ध, नी -2

* म, ग, रे..... सा - 3



   डोल - डोल कछु बोलत बदली

सा, नी,सा, नी, ध,प, म, ग,रे, नि, रे, सा 

    आँख में आँसू तोलत, बदली - 2

   सा, ग, रे, म, प,म, ग,रे, नि, रे, सा 

डोल - डोल........

   छायो मेघ घटा घनघोरो 

 सा,म, रे, म, प, म, प, रे, नी, रे,सा 

    नाचे मोर बनी चाँद - चकोरो - 2

 ध, प, म, ग, रे, म, म, ग, रे, नि, रे, सा 

      फिर भी डोलत जावे है पगली 

नी, म, नी, ग, म, प, सा, रे,रे,म, प,नि

       डोल - डोल.....

   सुध बिसरावे सावन जग की

सा, म, रे,प, म,प, ग, रे, नी, रे, रे, सा 

     जाने है चाँद क्या आश है खग की?

रे, सा, रे, सा, म, ग, ग, रे, रे, नि, रे, सा 

     हर बूंद पे जीवन तोले है बदली 

सा,नी सा, नी, ध,प,म, ग,रे,नि, रे,सा, रे,सा 

   आँख में आँसू होठ हँसे है 

सा, ग, रे, म, प, म, ग, रे, नि, रे, सा 

    जाल बिना ही क्यों जान फंसे है? 

रे, सा, रे, सा, म, ग, ग, रे, रे, नि, रे, सा 

      रंग नहीं जब कोइ किरण को 

सा, ग, रे, म, प,म,म, ग, रे, नि, रे, रे, सा 

      इंद्र धनु क्यों दिखा वे - है अब ही!

रे, सा, रे, सा, म, ग, ग, रे, रे, नि, रे, सा 

       डोल - डोल........

      किन्हों नहीं जब कोइ श्रृंगार 

सा, ग, रे, म, प, म, ग, रे, नि, रे, सा 

        फिर भी क्यों चमकत है भाल!

रे, सा, रे, सा, म, ग, ग, रे, रे, नि, रे, सा 

    सखीरी, बिजुरी देखी क्यों रोवे है नजरी?

सा,नि, ध,प, म, ध,प, म, ग, रे, नि, रे, सा, रे, सा 




     



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