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Tarika Singh

Abstract

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Tarika Singh

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बची रहेगी प्रकृति

बची रहेगी प्रकृति

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एक समय की बात है 

जब घना वन हुआ करता था, 

वृक्ष हुआ करते थे

सुंदर होती थी दुनिया उनकी 

पंछी सारे वहीं रहा करते थे

वन अब नष्ट हो रहा है

वृक्ष सारे गिर रहे है

भयभीत हैं ये 

जाएँ तो कहाँ जाएँ 

शाखों की तलाश में मिलती हैं 

बिजली की नंगी तारें 

अब नहीं मिलते ये हर जगह 

सहज सुलभ 

हो रहे हैं प्रतिदिन दुर्लभ 

गर बचाना है दिल की बगिया का हरापन 

रोज डालो दाने मुंडेर पर 

रखो कटोरी भर जल

यकीनन ये आएंगे 

खूब चहचहाऐंगे 

करेंगे जल क्रीडाएं

बची रहेगी तब प्रकृति 

असर करेंगीं इनकी दुआएं 

हरी भरी रहेगी धरती ।

   


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