बातों में मेरी मत आना इतनी
बातों में मेरी मत आना इतनी
जिस पेड़ से बात करनी थी
वो तो उजड़ गया
जो रह गए पेड़
वो तो सिर्फ परछाईं दे रहे हैं
कहाँ है तू कहाँ हूं मैं
छोड़कर साथ हम तो अपने आप से बात कर रहे हैं
तुम छोड़कर आओ अब ख्वाईशे
हम तो सबकुछ छोड़कर सब्र कर रहे हैं
भूलना ही है अंत मे तो तुम क्या याद कर रहे हो?
बातों में मेरी मत आना इतनी, हम तो अपनी बात कर रहे हैं
जाकर हम गहरी बातों में
खुद को रोजाना आराम दे रहे हैं।
