बातें
बातें
कभी कभी खुद से बातें किया करो वो कहता है हमसे,
उन्हें क्या पता हम खुद से और उनसे कितने बातें करते हैं।
उसे कभी हमसे बातें करने की फुर्सत शायद मिली ही नहीं,
या तो वो खुद में उलझा रहता है या अपने ख्यालों में,
कोई कहे उसे कभी हमसे भी कुछ गुफ्तगू करे और
उलझे हमारी बातों में, अपने सिवा कभी हमसे भी मिले,
बहुत कुछ कहना चाहती है,
उसकी वो आँखें जिन्हें कभी देखा था कुछ पल के लिए हमने
शायद वो ही हमसे बाते करें क्यूंकि उसको तो खुद
के ख्यालों से फुर्सत मिलती नहीं
कभी कभी खुद से बातें किया करो वो कहता था हमसे।

