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Rajan Patekar

Abstract

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Rajan Patekar

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बारिश

बारिश

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एक तरफ दूरी है 

दूजी तरफ बारिश।

वक़्त की जैसे हो मजबूरी

घड़ी ने की है साजिश ।।

सन्नाटों की बस्ती में

हँसी की है गुंजाइश।

जल्दी से कट जाये ये पल

अब बस यही है ख्वाहिश ।।


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