Nalini Mishra dwivedi
Abstract
आओ भीगे बारिश मे
मस्ती मे झुमे बारिश ने
जब भी बारिश आऐ
इन्द्रधनुष को साथ लाये।
हरियाली आ जाए
जब भी बारिश आए
बच्चे,बुढे सब के चेहरे
पर खुशहाली छाए।
कागज की नाव बनाके
चलो पानी मे तैराये
आओ मिलकर भीगे
बारिश मे
इस बारिश का
आनंद उठाये।
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बहुत छोटी है न तेरी ये ज़िन्दगी बहुत छोटी है न तेरी ये ज़िन्दगी
हम जो धर्म निभाते हैं महीने के 27 दिन तुम सिर्फ 3 दिन ही निभा देना। हम जो धर्म निभाते हैं महीने के 27 दिन तुम सिर्फ 3 दिन ही निभा देना।
ओर मेरी मुस्कान फैल जाती है होठों से उभरती पूरे चेहरे पर। ओर मेरी मुस्कान फैल जाती है होठों से उभरती पूरे चेहरे पर।
ख़ुदा की डायरी में सबसे ऊपर होगा। ख़ुदा की डायरी में सबसे ऊपर होगा।
मगर मेरा वो गाँव मुझे बहुत याद आता है। मगर मेरा वो गाँव मुझे बहुत याद आता है।
नहीं मिलेगा कहीं नहीं मिलेगा, जहां तुम हो बस वही मिलेगा। नहीं मिलेगा कहीं नहीं मिलेगा, जहां तुम हो बस वही मिलेगा।
जिगर के टुकड़े को नाज़ों से पालना और पराये को सौंपना इतना आसान नहीं जिगर के टुकड़े को नाज़ों से पालना और पराये को सौंपना इतना आसान नहीं
अब मेरे हर रात की कोई सुबह नहीं, अंधेरों में जबसे मैं बसने लगा हूं। अब मेरे हर रात की कोई सुबह नहीं, अंधेरों में जबसे मैं बसने लगा हूं।
छांव में अपने ममता के आँचल में मुझे समेत लो माँ, मेरी आवाज सुनो माँ। छांव में अपने ममता के आँचल में मुझे समेत लो माँ, मेरी आवाज सुनो माँ।
बिजली कड़क रही है जैसे कहीं प्यार हो जाने को है। बिजली कड़क रही है जैसे कहीं प्यार हो जाने को है।
और ना हमें रहने देते हैं। डर लगता है माँ, डर लगता है ! और ना हमें रहने देते हैं। डर लगता है माँ, डर लगता है !
मेरा संसार जहां सुबह जैसी सुबह है और शाम जैसी शाम है। मेरा संसार जहां सुबह जैसी सुबह है और शाम जैसी शाम है।
रिश्तों के आधार की, दरक रही है नींव। समय चक्र के खेल में, भटक गए सब जीव।। रिश्तों के आधार की, दरक रही है नींव। समय चक्र के खेल में, भटक गए सब जीव।।
समय किसी के हाथ न आया समय की है अजब ही माया इसके आगे हर कोई झुकता समय किसी के लिए न रुकता। समय किसी के हाथ न आया समय की है अजब ही माया इसके आगे हर कोई झुकता समय किसी के...
उल्फ़त में दूरी है, फुरक़त नहीं है, बेवफ़ाई मेरी तो फ़ितरत नहीं है। उल्फ़त में दूरी है, फुरक़त नहीं है, बेवफ़ाई मेरी तो फ़ितरत नहीं है।
इस समय त्योहारों का मौसम चल रहा है पर साथ ही लोकतंत्र का भी। इस समय त्योहारों का मौसम चल रहा है पर साथ ही लोकतंत्र का भी।
बल्कि जमाने के साथ, एक दिन खुद बदल जाओगे। बल्कि जमाने के साथ, एक दिन खुद बदल जाओगे।
सिर धूनता वह रास्ता भी अब वह रास्ता कहाँ रहा ! सिर धूनता वह रास्ता भी अब वह रास्ता कहाँ रहा !
युद्ध तो विध्वंसक है कि युद्ध तो विध्वंसक है। युद्ध तो विध्वंसक है कि युद्ध तो विध्वंसक है।