बालश्रम
बालश्रम
वो
बिन
पिता का
बेटा था
लेकिन
होनहार था
मां
बीमार
रहती
थी
घर की
जिम्मेदारियों
का बोझ
सर पर
आ
गया
था
होटलों में
वो
काम
करता
बर्तन
मांजता
उसका
मालिक
उसे
प्रताड़ित
बहुत हीं
प्रताड़ित
करता
जी में
आता
नौकरी
छोड़ दे
लेकिन
तभी उसके
बीमार मां
की याद आती
वो
रात रात भर
रोता
सुबह
फिर
अपने
काम पर
लग जाता
नौकरी नहीं
छोड़ सकता
मजबूरी का
मारा था।
