बालश्रम...घोर अपराध।
बालश्रम...घोर अपराध।
बचपन... एक सुहाना सफर,
या यूं कहूं यादों का पिटारा,
मस्ती और शरारतों से भरपूर्ण,
पर ये क्या...,
छोटे छोटे बच्चों के हाथों में औजार,
हर दुकान फैक्ट्री सब जगह बच्चे ही बच्चे,
छोटी सी उम्र में जोखिम भरा काम,
सचमुच कैसे हम इतने स्वार्थी बन गए,
खेलकूद मौजमस्ती की उम्र में उनसे कराते काम,
क्या पता नहीं उनको बालश्रम एक घोर अपराध है,
बच्चे तो देश का सुनहरा भविष्य है,
क्यों उनसे उनका बचपन छीनते हो,
क्यों खेलने कूदने की उम्र में औजार थमा दिए,
अभी तो उनको पढ़ना लिखना है,
क्यों उनसे काम कराते हो,
बच्चों की उम्र खेलकूद मस्ती करने की है,
काम करने की अभी उनकी उम्र नहीं,
अभी उनको जीवन में बहुत कुछ हासिल करना है,
इसलिए बच्चों को जीने दो भरपूर उनका बचपन,
ये उनका अधिकार है उनसे मत छीनो उनका आसमां।
