STORYMIRROR

shruti narula

Tragedy

2  

shruti narula

Tragedy

औरत

औरत

1 min
241

कुछ ऐसे भी दर्द है, जो वो चुपचाप सह जाती है,

कभी बहुत सी ऐसी चीज़ें जो वो कह नहीं पाती है


कुछ चुभते दुख अपने वो सबसे छुपाती है,

ऐसे भी थोड़े ज़ख्म हैं, जो वो नहीं बताती है


हल्की मुस्कान तले दिल के वो बोझ दबाती है,

उसको हक़ है बिलख के रोने का, जब कभी टूट सी जाती है !



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from shruti narula

औरत

औरत

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Tragedy