असीम प्यार
असीम प्यार
चूल्हे में
उसके
उठते हुए
धुएं में
उस
जली
रोटी में
धुएं के
उठते हुए
गुब्बार से
आंख से
गिरते हुए
आंसू में
मां की
चेहरे की
झुर्रियों में
होता है
असीम
प्यार।
चूल्हे में
उसके
उठते हुए
धुएं में
उस
जली
रोटी में
धुएं के
उठते हुए
गुब्बार से
आंख से
गिरते हुए
आंसू में
मां की
चेहरे की
झुर्रियों में
होता है
असीम
प्यार।