Sunriti Verma
Classics Inspirational
वन ही अरण्य,
वन ही जीवन।
वन ही कान्तार,
वन को हमारा समपर्ण।
है यह घने व विशाल।
करते रक्षा जैसे हो ढाल।
है वर्षा से संबंधित,
वन को हमें स्वयं को
करना है समर्पित।
प्रकृति बाध्य...
गीत
मेघ
क्रम
व्यंजन की यह ...
कला
कविता है क्या...
विष
क्या है यह?
पुष्प
नख से निकली भगवान विष्णु के ब्रम्हा के कमण्डल ने समाहित किया। नख से निकली भगवान विष्णु के ब्रम्हा के कमण्डल ने समाहित किया।
करूंँ भवानी तेरा आह्वान! लिए श्रद्धा की थाल! करूंँ भवानी तेरा आह्वान! लिए श्रद्धा की थाल!
जय हो माँ शैल तेरा दर्स लगे स्पर्श। जय हो माँ शैल तेरा दर्स लगे स्पर्श।
भरी सभा में साड़ी खींचता दुशासन बेबस असहाय द्रौपदी। भरी सभा में साड़ी खींचता दुशासन बेबस असहाय द्रौपदी।
साथ में मगर इंद्रधनुष से हम बिखेरते सुंदर रंग चारों तरफ। साथ में मगर इंद्रधनुष से हम बिखेरते सुंदर रंग चारों तरफ।
हे उद्धव क्या मुझे समझाएं ज्ञान की बातें काहे बतलाएं। हे उद्धव क्या मुझे समझाएं ज्ञान की बातें काहे बतलाएं।
बचपन से शिव को जिसने प्रेम किया पार्वती माता थी वो।। बचपन से शिव को जिसने प्रेम किया पार्वती माता थी वो।।
भवन को अपनी ममता से घर अलंकरण देती है ! अपनी ममता की छाँव में स्वर्ग सुख भर देती है ! भवन को अपनी ममता से घर अलंकरण देती है ! अपनी ममता की छाँव में स्वर्ग सुख भर ...
मोरपंखी हरा रंग होता बहुत ही मनमोहक, मोरपंखी रंगो जैसा अद्भुत नूरानी आकर्षक। मोरपंखी हरा रंग होता बहुत ही मनमोहक, मोरपंखी रंगो जैसा अद्भुत नूरानी आकर्षक।
इंद्रिय सारी लगी हुईं नित, भोग-भाव की लोलुपता में इंद्रिय सारी लगी हुईं नित, भोग-भाव की लोलुपता में
पूजी जाती देवी कुष्मांडा रूप में, नवरात्रि के चौथे दिन। पूजी जाती देवी कुष्मांडा रूप में, नवरात्रि के चौथे दिन।
शैलपुत्री गिरिसुता ! मातु वांछित दायिनी !! उत्कट तपस्या लीन : साधक ब्रह्मचारिणी !! शैलपुत्री गिरिसुता ! मातु वांछित दायिनी !! उत्कट तपस्या लीन : साधक ब्रह...
विकट था विलग रहना प्रेम में दोनों के एक अंतर्मन। विकट था विलग रहना प्रेम में दोनों के एक अंतर्मन।
स्त्री से ही घर परिवार , स्त्री बिन ना रहे संसार। स्त्री से ही घर परिवार , स्त्री बिन ना रहे संसार।
अष्टभुजी मां कुष्मांडा को सादर कर लीजिए प्रणाम। अष्टभुजी मां कुष्मांडा को सादर कर लीजिए प्रणाम।
सोच ही जीवन में मन की रहती है जीवन जीते धन के साथ भाव रहते हैं। सोच ही जीवन में मन की रहती है जीवन जीते धन के साथ भाव रहते हैं।
शिवलिंग को जो करने चली थी खंडित खुद ही हो गई थी वो खंडित। शिवलिंग को जो करने चली थी खंडित खुद ही हो गई थी वो खंडित।
शुम्भ निशुंभ और रक्तबीज ने मचा रखा था धरा पर हाहाकार। शुम्भ निशुंभ और रक्तबीज ने मचा रखा था धरा पर हाहाकार।
ना आए कभी ऐसा वक़्त कि ईमान गिर पड़े। ना आए कभी ऐसा वक़्त कि ईमान गिर पड़े।
आदिशक्ति जगदम्बिका , महाशक्ति गुण खान ! आदिशक्ति जगदम्बिका , महाशक्ति गुण खान !