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अपने आप को एक इंसान बना लो

अपने आप को एक इंसान बना लो

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मंदिर में जब मैं गया

कोई बोलती मूरत ना मिली

मस्जिद में जब मैं गया

कोई भली सी सूरत ना दिखी


चर्च और गुरूद्वारे के

दरवाजे भी मैंने खटखटाऐ

वहाँ भी मगर

सब दौलत के पीछे ही पाऐ


मैं तो कहता हूँ ए धर्म के सौदागरों

कुछ तो शर्म करो

ईमान बेच दिया, भाईचारा बेच दिया

कम से कम धर्म तो ना बेचा करो


ए धर्म के सौदागरों, कुछ ऐसा करो

अपने आप को एक इंसान बना लो

अपने दिल के मंदिर की कुरान में

किसी वाहेगूरू या फादर को बैठा लो।।


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