अन्तर
अन्तर
लिखने में
असली में
अंतर होता है
अनुभूति,
प्रतिभूति,
अहसासों का
समुद्र होता है।
शब्दों में कहाँ
दर्द उतरता है
,
जो मन भीतर
सहता है
।
कागज़ पर लिखना
आसान बहुत है,
पर जीवन को जीना
इम्तिहान होता है।
चेहरे पर मुस्कान
सब लिख देते हैं
,
आँखों में छिपा
दर्द
कोई पढ़ता नहीं।
गिरजा शंकर पचौरी * शिवाय*
( Manager Plant Engineering and Robotics
