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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational

अकेला चलो रे

अकेला चलो रे

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मैं अकेला ही चला था सफर में,

कोई साथ मेरे हो ना सका था !

थी मुसीबत लाख राहों में हमारे,

फिरभी मुझको हरा ना सका था !


सहारे की जरूरत मुझे ना लगी,

हवा के रुख को मैं जानता था !

आँधियों के थपेड़ों से डरता नहीं,

मुझे तो बखूबी जूझना आता था !


मुझे जो मिलते थे इन राहों में,

उन्हें मंजिल तक पहुँचा देता था !

ना कोई शिकायत का ही इजहार,

कभी ना स्वप्न में भी करता था !


मुसाफिर हैं हमसभी इस डगर के,

साथ जबतक साथ है चलते रहेंगे !

कारवाँ के लोग अपनी मंजिलों पर,

पहुँचकर फिर अकेले चलते चलेंगे।


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