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Sonia Madaan

Inspirational

2.6  

Sonia Madaan

Inspirational

अगर मैं होती

अगर मैं होती

1 min
374


अगर मैं होती पंछी, मुझे कैद न कर पाते,

मैं स्वच्छंद पंख फैला उड़ जाती।


अगर मैं होती सूरज, मेरा तेज न सह पाते,

पर जीवन में तुम्हारे उजाला लाती।


अगर मैं होती नीर, मेरा बहाव न रोक पाते,

पर सूखी धरा की प्यास बुझाती।


अगर मैं होती पवन, स्थिर मुझे न कर पाते,

पर जीवन में तुम्हारे शीतलता लाती।


अगर मैं होती कलम, मेरी ताकत को भेद न पाते,

पर जीवन में तुम्हारे बदलाव लाती।


पर मालिक ने मुझे एक औरत बनाया,

और तुमने मुझ पर निरंतर ज़ुल्म ढाया।


अगर, बस अगर मैं एक बेजान चीज़ होती

तुम मुझे कष्ट न दे पाते

मैं फिर भी तुम्हारे काम आती,

मैं फिर भी तुम्हारे काम आती ।।


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