आगमन बसंत का।
आगमन बसंत का।
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बसंत के आगमन से
सकल प्रकृति आज मदमस्त है,
गूंजे चहूं दिशा में
पंछियों का मधुर शोर है।
फैला फिजाओं में
गुलाब का इत्र है,
चंचल पवन संग पीली सरसों
डोले इधर-उधर है,
खुशियों की लालिमा गगन में छाई
दिनकर भी हुआ आज भाव विभोर है,
फूलों से रसपान को भवरों में लगी होड़ है।
नव जीवन का संचार हुआ
सृष्टि के कण-कण में,
पीत चुनर ओढ़े वसुधा भी
कभी लजाए, कभी मुस्काए,
बसंत से फैली हर ओर
नई उमंग है।
