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Ashok deep

Romance

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Ashok deep

Romance

अगर करो तुम वादा मुझ से

अगर करो तुम वादा मुझ से

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मरुधर में भी फूल खिला दूँ

  पर्वत को भी धूल बना दूँ

  अगर करो तुम वादा मुझसे 

   प्राण ! मेरे संग चलने का।


हँस-हँसकर फूल चुनूँ पथ के 

 पलकों की नाजुक उँगली से 

  बणी ठणी-सा चित्र उकेरूं

    मग पर करुणा कजली से 


डगर-डगर की प्यास बुझा दूँ

 राहों की भी आह मिटा दूँ

  अगर करो तुम वादा मुझसे 

   जलद ! मेरे संग गलने का ।


पीप मचलते छालों का मैं

 दर्द बसा लूँ अंतर्मन में 

  मोती-माणक तारे जड़ दूँ

   सपनों के जर्जर दामन में 


हर आँसू की उम्र घटा दूँ

 मधुर हास को शिखर चढ़ा दूँ

  अगर करो तुम वादा मुझसे 

   कमल ! मेरे संग खिलने का।


अटकी है जो नाव भँवर में 

 दूँ तट का आलिंगन उसको 

  खेते  तार  साँस का टूटे 

   तो भी कुछ शोक नहीं मुझको 


हर भटके को राह दिखा दूँ

 रोते मन को जरा हँसा दूँ

  अगर करो तुम वादा मुझसे 

   मीत ! मेरे संग ढलने का।


नूर नोच लूँ आगे बढ़कर 

 अँधियारी काली रातों का 

  रहन पड़ा जो पूनम कंगन 

    छुड़ा बढ़ाऊँ सुख हाथों का 


हर रजनी की मांग सजा दूँ

 सुबहों को भी सुधा पिला दूँ

  अगर करो तुम वादा मुझसे 

    दीप ! मेरे संग जलने का ।


फैल रहा जो धुआँ नगर में 

 पसर गया जो दर्द सफर में 

  छेद रहा जो कांटा मन को 

   बैठ गया जो तीर जिगर में 


पथ से उनको जरा हटा दूँ

 दर्दों का भी नाम मिटा दूँ

  अगर करो तुम वादा मुझसे

    शलभ ! मेरे संग जलने का ।

           


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