STORYMIRROR

Krishnakumar Mishra

Abstract

3  

Krishnakumar Mishra

Abstract

अधूरी मोहब्बत

अधूरी मोहब्बत

1 min
47

दस्तक दिल पर कोई दे भी कभी मेरे तो 

दिल मेरा ये अब सुनता कहांँ है? 

जो ख्वाब तुम संग देखे थे मैंने 

वो ख्वाब अब ये बुनता कहां है? 

कहता है मुझको तुम मंदिर बना लो 

देवी का स्थान दूजा और कोई होता कहां है? 

जब याद आती है तेरी तड़पता है ये अक्सर 

दूजा कोई दर्द इसे होता कहां है? 

मोहब्बत तो बिछड़ के भी रहती है ज़िंदा ज़िन्दगी मे 

पाता है आशिक़ यादों की सौगात वो कुछ खोता कहां है? 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract