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Anima Tiwary

Abstract Romance Classics

4.8  

Anima Tiwary

Abstract Romance Classics

अधूरे अनकहे वादे

अधूरे अनकहे वादे

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147


आज आसमां कुछ उदास सा है

हवाओं में भी थोड़ी नमी सी है


आज आखें अकेले में फ़िर से रोई हैं

आज तेरी यादों में फ़िर से तन्हाई सी है


आज फ़िर से अपने ख्वाबों पर

मैंने बिखरने की सिकांज देखी है


आज फ़िर से मेरे वादों पर

मैंने अधूरेपन की जंग लगी देखी है


मगर तुझसे गीले सिकवे करूं भी तो कैसे करूं

तूने कभी कोई वादा किया ही ना था।


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