अच्छा लगता है
अच्छा लगता है
वो तेरा हाय, हैलो और ओके,
पिघल गया ये दिल,
ठहरा मासूम
इसे कौन समझाए और कौन रोके..
अब वो हाय, हैलो,
"कब और कहाँ मिलना है"
में बदल गया,
अब जाके मुलाकातें शुरू होगी
ये मासूम दिल भी समझ गया..
अच्छा लगता है
तुझसे यूँ मिलके घंटों तक बैठना,
और देखना,
वो तेरा अपने बालों का यूँ समेटना..
फिर धीरे-धीरे तेरी आँखों का,
मेरी आँखों से टकराना...
और तेरा दुपट्टे का एक तरफ़ सरकाना..
फिर दाँतों तले, होठों को दबाना...
अच्छा लगता है....
अच्छा लगता है
चलते चलते ढेर सारी बातें करना ,
कहते कहते चुप हो जाना,
फिर धीरे से शरारत से
तेरे हाथ का मेरे हाथों में आना..
और मन्द मन्द हवाओ का,
अपने चेहरे से कुछ इस तरह टकराना..
हम दोनों का वो
खामोशी सा माहौल बनाना..
और कुछ ना कहते हुए भी,
बहुत कुछ समझ जाना..
अच्छा लगता है...
तेरा साथ, तेरी बातें,
वो दिन और वो रात,
इस दिल में कैद है,
वो सारी मुलाकातें
और वो हर एक वादे,
जो हमने किये थे एक साथ..
और मुझे उम्मीद है कि वो,
हाय-हैलो और ओके वाली बात
तूने की होगी सिर्फ़ मेरे साथ....
मैंने कहा था कि ये दिल है मासूम
ये पिघल गया,
एक बार नहीं,
दो बार नहीं,
हज़ार बार तेरे लिए फ़िसल गया..
अब इस दिल को
और पिघला न पाऊँगा...
और इसिलिये,
किसी और को कैसे सोचूँ...
तुझे इतनी जल्दी भुला न पाऊँगा..
अच्छा लगता है
वो तेरा हाय- हैलो और ओके,
ये दिल है मासूम
इसे कौन समझाए और कौन रोके.. ।।

