आत्म पथ की अलख।
आत्म पथ की अलख।
आओ एक दीप जलाएं प्रिये,
सब मिल जुल कर एक प्रकाश पुंज ले,
ज्ञानरूपी तम मिटाए प्रिये।
आओ एक दीप जलाएं प्रिये।।
किसी का तन से, किसी का मन से,
किसी-किसी के गीत मधुर से,
सबके मन को हर्षायें प्रिये।
आओ एक दीप जलाएं प्रिये।।
दे न सको धन-दौलत किसी को,
बना न सको बलवान किसी को,
पर सेवा को हृदय में बसाएं प्रिये।
आओ एक दीप जलाएं प्रिये।।
काम-क्रोध का फैला अंधेरा,
पग-पग पर निंदा का बसेरा ,
फिर भी सबको गले लगाएं प्रिये।
आओ एक दीप जलाएं प्रिये।।
ये जीवन एक पल का है डेरा,
फिकर मत कर कुछ नहीं "नीरज" तेरा,
आत्म पथ की अलख जगाए प्रिये।
आओ एक दीप जलाएं प्रिये।।
