STORYMIRROR

Diksha Bisht

Abstract

2  

Diksha Bisht

Abstract

आशिकी

आशिकी

1 min
18

 कुछ तो खूबियां रहीं होंगी,

यों कोई गैर - निजी तो नहीं होता।

गलतफहमियों के घेरे में खो गए हम,

कि मेरे अपनो में इतना उभर गए तुम।

कि नींदों में भी नींदें नहीं,

कोई तो गहरा निशां रहा होगा।

जो पल में चुरा लिया दिल तूने,

ईश्क ए मैदां का खिलाड़ी रहा होगा।

और मेरी आंखों में अपनी ही तस्वीर छांप ली,

आशिक यकीनन पुराना रहा होगा।

   

         


ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

Similar hindi poem from Abstract