STORYMIRROR

RAHUL ROHITASHWA

Inspirational

3  

RAHUL ROHITASHWA

Inspirational

आशीष

आशीष

1 min
170

आशीष तुम्हारा सर पर है

फिर आज मुझे किसका डर है

जब भी उत्पीड़न मुझे मिला

दिल चीखा और होंठ हिला

तब तूने चुपके से आकार

दुख दूर किया, सुरभित घर है

बिना मांगे तुमने सदा दिया

मैं विस्मित हूँ, सब कार्य किया

कैसे तेरा गुणगान करूँ

कुछ शब्द नहीं, चक्षु तर है

इतने पर भी विश्वास नहीं

मैं तेरा हूँ, यह आस नहीं

हर रोज़ कृपा की सरिता है

हर रोज़ दया की निर्झर है

आशीष तुम्हारा सर पर है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from RAHUL ROHITASHWA

आशीष

आशीष

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Inspirational