STORYMIRROR

Anudeep Kaur

Abstract

2  

Anudeep Kaur

Abstract

आज़ाद हिन्दुस्तान

आज़ाद हिन्दुस्तान

1 min
101

यह मेरे वतन की कहानी , मेरी खुद की जुबानी 

एकता इसकी शान ,विभिन्नता इसकी पहचान है 

आज़ाद की आवाज़ के साथ जुडी इसकी आजान है 

यही शमशान है यही कब्रिस्तान है 

आज़ाद कराने में जिसको दिए कितनो ने बलिदान है 

ख़ुशनसीब है वो जो बसा हिदुस्तान है 

ख़ुशनसीब है वो जो बसा हिदुस्तान है.



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract