Sudhirkumarpannalal Pratibha
Abstract Inspirational Thriller
आदतें
अगर
अच्छी
है
तो
इज्जत
कई
गुना
बढ़
जाती
बुरी
बची
हुई
भी
चली
मनुष्य
का
गहना
हैं।
बेटी
रिश्तों का कम...
प्रेम सर्वव्य...
प्रेम निशब्द
प्रेम
सही मायने में...
तुम्हारे सिवा सब थे यहाँ मैं, तुम्हारी यादें और मेरी वेदनाओं के अवशेष तुम्हारे सिवा सब थे यहाँ मैं, तुम्हारी यादें और मेरी वेदनाओं के अवशेष
देशवासियों की समस्या, भविष्य का निकलेगा वही हल, विचारों, सुझाओ, कृत्यों से जन सेवक कर देशवासियों की समस्या, भविष्य का निकलेगा वही हल, विचारों, सुझाओ, कृत्यों से ज...
क्यों अपना इंतजार मुल्तवी करके जाते हैं लौट कर नहीं आना है ये सीधे क्यों नहीं बतलाते ह क्यों अपना इंतजार मुल्तवी करके जाते हैं लौट कर नहीं आना है ये सीधे क्यों नहीं...
हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे प्राप्त वरदान। प्रज्वलित अग्नि ज्वाला में सुरक्षित रहत हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे प्राप्त वरदान। प्रज्वलित अग्नि ज्वाला में सुर...
बिना जान पहचान भी दोस्ती कर लेना गुरुजनों से सीखना, बिना जान पहचान भी दोस्ती कर लेना गुरुजनों से सीखना,
फिर सोचा, क्या जाएगा? चखने में एक बार, शायद रुतबा भी बढ़ जाएगा। फिर सोचा, क्या जाएगा? चखने में एक बार, शायद रुतबा भी बढ़ जाएगा।
ये भोली सूरत बनाकर, दिल के टुकड़े टुकड़े कर जाना। ये भोली सूरत बनाकर, दिल के टुकड़े टुकड़े कर जाना।
ये लोग किसी जाति के नहीं थे ये बुरे और दुष्ट लोग थे। ये लोग किसी जाति के नहीं थे ये बुरे और दुष्ट लोग थे।
दुश्मनों की चालों को, नाकाम कर रहा हूं। दुश्मनों की चालों को, नाकाम कर रहा हूं।
बारिश में भीगता और धूप में झुलसता है अन्न पहुंचाने के लिए यह ठंड में ठिठुरता है बारिश में भीगता और धूप में झुलसता है अन्न पहुंचाने के लिए यह ठंड में ठिठुरता...
राम-रहीम, कृष्ण-करीम का अपवाद यही रह जाएगा । राम-रहीम, कृष्ण-करीम का अपवाद यही रह जाएगा ।
कर रही प्रकृति स्वागत वसंत ऋतु का, छाई है बहार चैरी ब्लॉसम की। कर रही प्रकृति स्वागत वसंत ऋतु का, छाई है बहार चैरी ब्लॉसम की।
मुख मोड़ दे कल कल कर बहती हुई निर्भीक निर्झरा का..!! मुख मोड़ दे कल कल कर बहती हुई निर्भीक निर्झरा का..!!
वो तो वक्त है जो हंसाता और रुलाता चला गया गुजर रहे थे दिन और गुजरता चला गया। वो तो वक्त है जो हंसाता और रुलाता चला गया गुजर रहे थे दिन और गुजरता चला गया।
जो एक चोटी पर खड़ी है जहाँ, हवाओं में उड़ रहे थे उसके बाल। जो एक चोटी पर खड़ी है जहाँ, हवाओं में उड़ रहे थे उसके बाल।
लेकिन जिंदगी में अचानक आया सतत दुखदायी तूफान, लेकिन जिंदगी में अचानक आया सतत दुखदायी तूफान,
कैसे निकल गए हमारी शादी के ये 24 साल पता ही नहीं चला मेरी बीवी इतनी बेमिसाल। कैसे निकल गए हमारी शादी के ये 24 साल पता ही नहीं चला मेरी बीवी इतनी बेमिसाल।
मुसाफिर जिस जगह पर मनभेद नही है समझ लेना कि घर वही है। मुसाफिर जिस जगह पर मनभेद नही है समझ लेना कि घर वही है।
भारतीय संस्कृति का सुखी-संसार में बताती भरीव योगदान। भारतीय संस्कृति का सुखी-संसार में बताती भरीव योगदान।
पर बेबस लाचार है गरीब, मजदूर, रिक्शे ठेले वाले पर बेबस लाचार है गरीब, मजदूर, रिक्शे ठेले वाले