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Jyoti Gupta

Abstract

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Jyoti Gupta

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"माँ ममता की मूरत"

"माँ ममता की मूरत"

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 माँ जीवन देने से लेकर,

और जीवन को कैसे जिये

वो सब शिखाती है ---


सारे जहा की खुशिया वो हमें दे,

खुद मानो ऐसे जाताती है,

सारी खुुशियो से महफूज है वो,

ऐसी है मेरी मा ------


गर चोट लगे हमको तो ,

वो रोटी है अस्को से,

सारे आते उल्फतो को,

वो  झट पट दुुर। कर देती है।


मााँके किस्से है बहुत बड़े,

ऐसे सब्दो में नही किये जायेंगे बया,

कीरदार बड़ा हीी ला है,

ममता की मूर्तत छाया है,


संसार यही हैै अपना,

अपनी ये है जन्न्त ,

आँचल में शीतल रश है,

अपना पन बस मा ही है।


इसके नभ में क्रीड़ा जो ,

आंनद का रस भर देता है,   

खेला है जिसने  गोद में माँ के,

वो ही इसका अनुभव करपाया है।


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