STORYMIRROR

Richa Goswami

Abstract

3  

Richa Goswami

Abstract

शिव शंकर

शिव शंकर

1 min
196

शिव ही पूजा

शिव ही ध्यान है

पार्वती संग विराजे

शिव कैलाश पर्वत

उनका धाम है


कंठ में नाग

जटाओं से बहती

गंगा धार हैं

कहते डमरू धारी

कपाल में चन्द्रमा

शोभायमान है


सृष्टि विनाशक

ललाट में त्रिनेत्र है

बेल, धतूरा विष का प्याला प्रिय उनको

बैल पर विराजमान है

त्रिशूल धारी, नाग धारी

भोले जिनका नाम है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract